Friday, 10 November 2017

मृत्यु के बाद भी क्या समाप्त नहीं होता?

जब सिकंदर की मृत्यु हुई तो उसने मरने से पहले ये कह रखा था कि जब उसकी शवयात्रा निकाली जाय तो उसके हाथ ताबूत से बाहर निकाल दिए जाएं। ताकि लोग ये देख सकें कि सिकंदर भी अपने साथ कुछ ना ले जा सका।
ऐसी कई बातें हम धार्मिक गुरुओं से सुनते है तथा धार्मिक पुस्तकों में पढ़ते हैं। लेकिन क्या कुछ ऐसा है जो हम मृत्यु के बाद भी साथ ले जा सकें?
मेरा उत्तर है हाँ। एक चीज है जो हमारे साथ जाती है हर स्थिति में वो है आध्यात्मिक प्रगति। हम अपने जीवन में ऐसे कई लोगों को देखते हैं तथा उनके किस्से भी सुनते जिन्होंने जीवन मे शून्य से शुरू करके अपार प्रगति की तथा अपार सफलता अर्जित की किन्तु जब उनका अंतिम समय आया तो कुछ भी उनके साथ ना गया। किन्तु आध्यात्मिक स्तर पर हम जो भी अर्जित करते है वह सदैव हमारे साथ रहता है। और मृत्यु के बाद भी हमारे साथ ही जाता है, और यह भी निर्धारित करता है कि अगले जन्म में हमारा जीवन किस ओर और किस प्रकार प्रगति करेगा।
ओशो अपने एक भाषण में कहते हैं कि भगवान बुद्ध कोई एक जीवन में बुद्ध नहीं बने थे। वो अपने पिछले कई जीवन के आध्यात्मिक प्रयासों और उनके परिणामों का योग के बाद बने संयोग का परिणाम थे।

किन्तु भगवान बुद्ध या किसी भी ऐसी महान आत्मा जिसका साक्षात्कार परम सत्य से हो चुका हो, के बारे में कोई बड़ी बात कहना मेरी क्षमता के बाहर है। परंतु में यह अवश्य कह सकता हूँ कि आध्यात्मिक प्रगति हमारे साथ रहती है तथा हमारे जीवन का मार्ग प्रसस्त करती है।

अतः हम सभी को भौतिक सुख साधन जुटाने के साथ ही आध्यात्म के लिए समय अवश्य निकालना चाहिए।
अंततः यही हमारी आत्मा का परम उद्देश्य है।

नमस्कार। ॐ शांति ॐ

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अग्रिम मैं। धन्यवाद।

Sunday, 8 October 2017

मन के भीतर की भीड़।


संसार में शायद कुछ ही लोग होंगे जिन्हें भीड़ से प्रेम होगा। लगभग सभी भीड़ से दूर समय व्यतीत करना चाहते हैं। चाहें कुछ पल ही क्यों न मिलें। जब कोई मानसिक रूप से थकान महसूस करता है तो डॉक्टर भी  यही सुझाव देते हैं कि कुछ दिन भीड़ भाड़ से दूर समय ब्यतीय कीजिये।

लेकिन भीड़-भाड़ से दूर जाके हर किसी को आराम नहीं मिल पाता। शांत जगह भी बैठ के मन के भीतर अशांति रहती है। क्या हम इसका कारण जानते हैं?
इसका कारण है हमारे मन के अंदर की भीड़ जो हमारा साथ नहीं छोड़ती।

लेकिन!!! मन के भीतर की भीड़❔❔❔ ये कैसी भीड़ है?
सामान्यतः बाहरी भीड़ में परिचित ब्यक्ति भी होते हैं और अपरिचित ब्यक्ति भी होते है। किंतु मन की भीड़ में वही लोग होते हैं जिनसे हम परिचित होते हैं। वो ब्यक्ति अपने बिचारों से सकारात्मक तथा नकारात्मक दोनो प्रकार से प्रभावित करते हैं। और हमारे निर्णयों तथा हमारी सोच को प्रभावित करते हैं। हम कई बार खुद को स्वतंत्र करना चाहते हैं किंतु अपने व्यक्तित्व की दुर्बलता के कारण खुद को उनके विचारों से, और इस सोंच से की हमारे कुछ करने से वो क्या सोंचेंगे, से अलग नहीं कर पाते। हम लोग उनके अच्छे या बुरे बिचारों को खुद से चिपका लेते हैं और फिर एकांत जगह मन की शांति की तलाश करते रहते है ठीक वैसे ही जैसे कि कस्तूरी मृग अपने उदर में कस्तूरी लिए कस्तूरी की तलाश में भटकता रहता है। और वो उसे कभी नहीं मिलती।

तो प्रश्न ये उठता है कि समाधान क्या है? कैसे मिले एकांत? कैसे करें इस भीड़ को दूर?
मन की भीड़ से दूर जाने का भी तरीका भी वही है जो बाहर की भीड़ से दूर जाने का है। साधन युक्त व्यक्ति भीड़ को दूर करने के लिए भीड़ से दूर चला जाता है। दुनिया की भीड़ को दूर करने के लिए आपके पास साधन का होना जरूरी है वरना ना चाहते हुए भी आपको रोज बस, मेट्रो में धक्के खाना पड़ता है औऱ ये चलता रहता है क्योंकि आपके पास विकल्प नहीं होता। आपको अपना जीवन चलाने के लिए कार्य करना पड़ता है। साधनवान अपनी साउंडप्रूफ महंगी कार में शीशे चढ़ाता है तथा आफिस में भी एक अकेले के केबिन में बैठता है और समय समय पर छुट्टियां मनाने जाता है। लेकिन मन की भीड़ से शायद वो भी न बच पाता हो। क्योंकि मन की दशा में ये साधन काम नही आते। 
मन में एकांत के लिए जो साधन आवश्यक है वो है एक शक्तिशाली व्यक्तित्व। शक्तिशाली व्यक्तित्व के लिए कुछ घटक है जिनके विकाश से व्यक्तित्व का निर्माण किया जा सकता है।
1. आत्मविश्वास- अपने निर्णय तथा अपनी सोंच पर विश्वास होने पर ही हमारे अंदर आत्मविश्वास का निर्माण होता है। और वो विश्वास हमे तब प्राप्त होता है जब हम ये जानते हैं की हम सही है। हमारी सोंच और हमारा निर्णय सकारत्मक है तथा किसी को नुकसान पहुचने की सोंच से प्रेरित नहीं है। ये हमारे स्वयं के उत्थान के लिए है।

2. समभाव- समभाव से तात्पर्य है कि हम सभी के प्रति समान भाव रखते है। एक ओर जहां हम अपनी स्वतंत्रता तथा अपने मौलिक अधिकारों के प्रति सजग है वही दूसरी ओर हम इस बात का ध्यान रखते हैं कि हम दूसरे प्राणियों के मौलिक अधिकारों तथा स्वन्तंत्रता में सेंध नही लगा रहे।

3. समाज के प्रति संतुलित सोंच- किसी ने सच कहा है कि यदि सभी आपसे खुश है तो आप जरूर दुखी ब्यक्ति हैं। इसलिए हमें ये ध्यान रखना चाहिए कि हम सभी को खुश नहीं रख सकते। लेकिन ये मान लेना भी गलत है कि उपरोक्त कथन का उल्टा , यानी कि सभी को दुखी करने से आप सुखी हो सकते है। समाज में आपके अधिकार भी है और दायित्व भी। इसलिए समाज के प्रति आपकी सोंच का संतुलित होना आवश्यक है। 

उपरोक्त घटकों का सही समन्यवय आपके व्यक्तित्व को शक्तिशाली बनाता है तथा आपके मन के भीतर के निरर्थक बिचारों से मुक्ति देता है। आपको ये नहीं सोचना पड़ता कि आपके संबंध में को क्या सोंच रहा है, क्योंकि आप पहले से ही सबका समन्यवय कर चुके होते है और धीरे धीरे आपका ब्यक्तित्व ही उस आधार पे निर्मित हो जाता है।
अंत तक मेरा लेख पढ़ने के लिए धन्यवाद। कृपया करके इसे अपने मित्रों के साथ शेयर करे। अपने कीमती comments भी करें। और यदि आप मेरे ब्लॉग को फॉलो करेंगे तो मुझे अति प्रसन्नता होगी। और आपतो जानते ही हैं कि प्रसन्नता बांटने से प्रसन्नता मिलती है।
नमस्कार।



Monday, 18 September 2017

निराकार का अंश।

साकार तू है
तो क्या हुआ।
निराकार का तू अंश है।।
निर्भीक बन
तू आगे बढ़।
चाहे सामने तेरे
क्यों ना कोई कंस है।।
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द्वंद है, विध्वंश है
संकट में जो धर्म है।
तब मन में लिए प्रश्न तू,
अर्जुन नही
कृष्णा का तू अंश है
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Friday, 15 September 2017

संसार का संचालक कौन???

हम सभी में से लगभग सारे लोग यह मानते हैं कि ईश्वर इस संसार का संचालक है। ऐसा मानने के साथ ही ये विचार भी अनायास ही आता है कि जब ईश्वर इस संसार को चलाता है तो फिर इस संसार में इतनी बुराई क्यों है?
इस प्रश्न का उत्तर मुझे एक जानकार व्यक्ति से प्राप्त हुआ। उन्होंने समझाया की ईश्वर इस संसार का संचालन नहीं करता। अपितु ईश्वर द्वारा प्रकृति का निर्माण किया गया। जिसे लोग प्रायः माया के नाम से भी जानते है, और उसी माया या प्रकृति के द्वारा इस सम्पूर्ण संसार का संचालन होता है। और सभी प्राणी प्रकृति के नियमों से वाद्य है और कर्मानुसार परिणाम को प्राप्त होते है। अतः ईश्वर को किसी भी घटना या दुर्घटना के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।
उनकी बात को अगर मैं आज के परिपेक्ष् में समझाने की कोशिश करुं तो यह कहना गलत न होगा कि ईश्वर ने प्रकृति या माया नाम के software का निर्माण किया है। जोकि प्राणियों के कर्मो के इनपुट को स्वीकार्य करता हूं तथा उन्ही कर्मों के आधार पर ही परिणाम का आउटपुट देता है। इस सॉफ्टवेयर के भी कुछ निष्चित सिद्धांत है जिनसे यह नहीं हटता।
अतः जैसा प्राणी सॉफ्टवेयर में इनपुट देता है वैसा ही आउटपुट पाने को बाध्य होता है। अब प्रश्न यह उठता हौ की जब सब कर्मों पर आधारित है तो ईश्वर की उपासना से क्या लाभ है?
इस प्रश्न के उत्तर के लिए अगली पोस्ट का इंतजार करें और मेरे इस ब्लॉग को सब्सक्राइब करें। इस पोस्ट को अंग्रेजी में भी ट्रांसलेट करने की में कोशिश करूंगा।
नमस्कार । आपका जीवन मंगलमय हो और ईश्वर की कृपा सभी पर बनी रहे।

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धन्यवाद

Monday, 21 August 2017

Excuse the excuses.

Image Credit: https://pixabay.com/
You can judge the character of a man/woman by his response when he/she face the failure. You can not believe a man who makes excuses for his failure or held others responsible for that. The man who takes responsibility for his actions and takes lessons from his failures is always respected.

But why people make excuses? They make excuses because of their inability to conquer the situation and inability to do necessary work before the situation arise. First, they make excuses to themselves, because they don't want to leave their comfort zone. So, those excuses keep them from going after their goal. When the damage is done they make excuses to the world.

Whatever is stopping you chasing your goals, whatever is stopping you leaving your comfort-zone is an excuse. These excuse will have serious repercussion if we don't change. So, before things go out of hands, you need to change. remember-

YOUR LIFE DOES NOT GET BETTER BY CHANCE. IT GETS BETTER BY CHANGE.                                                                                                                                           -Someone in Ted Talk

And a humble request. PLEASE FOLLOW and SHARE my blog and post.. And give your precious comments..

Sunday, 6 August 2017

Indian pre-workout diet.

These days most the guys who go to the gym are using lots of supplements. Sometimes excessive use of these supplements cause health problems.
Hence I would like to share a pre-workout recepie which is completely natural and tried and tested by a reputed Body Builder from India. He is Mr. Mukesh Gehlot. He has won several national and international titles in bodybuilding.
He shared his secret in one of his interview to someone.
In his early days in bodybuilding he use following diet before workout which kept him energetic during the workout and provided necessary nutrition.

The recipe is as follows...

Ingredients
       Few boiled potato
       One bowl of curd.

How to make..

Put the boiled potatoes in the curd, and then mix them together. You can add salt according to your taste. And eat it 15 to 20 minute before you start. Don't eat too much so that you feel heavy.

Well potatoes are full of carbohydrates, and curd is also full of nutrition. So enjoy this simple cheap and best pre workout recepie. Save money and improve health.

Take care. See you soon. And please share with your friends and comment you views.
Thanks a lot.

Friday, 28 July 2017

Let them play?

Any sport is for enjoyment. That should not be taken as war. Sports should be played with the spirit of game and they should be enjoyed with the same spirit.
Players are not the warriors. They are the players who are trying their best to perform and win then game for their team and the nation. When you buy ticket or watch them play on TV, it doesn't mean they are your slave or you are their master. When you throw bad remarks on them look at your self. Have you always been a winner at every aspect of your life. Have you always been honest with your family or with the society. The answers in most of the cases will be "NO".
Then why so much madness when any team could not supercede the efforts of other team.
Just asking.
Please watch game. Enjoy the performance. Don't expect players to fight war for you. They are not loosing by choice. They all give their best. Sometime efforts of one team supercede the efforts of other team and sometime superseded by others. Its just a game. Don't loose calm. Enjoy.
Please share and comment. Don't take personal.

मृत्यु के बाद भी क्या समाप्त नहीं होता?

जब सिकंदर की मृत्यु हुई तो उसने मरने से पहले ये कह रखा था कि जब उसकी शवयात्रा निकाली जाय तो उसके हाथ ताबूत से बाहर निकाल दिए जाएं। ताकि ल...